भोर अजे मेपल बिरछ रै हाथां Published by Lokayat Prakashan

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लोकायत प्रकाशन जयपुर, 2012

nandविश्वं-साहित्य में रूसी कवि येवगेनी येव्तुशेंको री कविता रौ आपरौ न्यांरौ रंग अर मिजाज मानीजै। समाजवादी व्यतवस्थार री रीत-नीत अर नेम-कायदां सूं आपरी न्यामरी सोच अर मानवी रिस्तां रै गरमास सूं सराबोर वांरी एक भरी-पूरी मोवणी दुनिया है, जिकी वांरी कविता नै समकालीन साहित्य-जगत में न्या री पिछांण देवै। वांरी कविता री एक लूंठी खासियत आ पण मानीजै के उणनै मूळ रूसी, अंग्रेजी के किणी भारतीय भासा में पढ़तां एक संवेदू पाठक रै मन में पैली इंछा आ ई जागै के वौ उणनै आपरी भासा में उल्थौ कर नै बांचै, जिणसूं के वा उणरै ई अणभव रौ अंग बण जावै। दुष्यंत रै इण सिरजण-अनुवाद नै हैंक इणी रूप में देखूं अर आं कवितावां नै आपरी भासा में पढ़तां न्या री उमंग अणभव करूं।
– नंद भारद्वाज, केंद्रीय साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार से सम्‍मानित प्रसिद्ध कवि- आलोचक