प्रेम का अन्य Published by Lokayat Prakashan

Prem ka anyaकिताब खरीदने के लिए दुकान का रास्ता यहां है

दो संस्करण 2011, 2012, लोकायत प्रकाशन जयपुर
रामकुमार ओझा अवॉर्ड 2012 से सम्मानित किताब

# किताब से तीन कविताएं #

जाते हुए इंडिया गेट से तीन मूर्ति या कनॉट प्लेस से तीन मूर्ति
दोनों थामे हाथ
अधरों से मौन
तुम निहारते हुए मुझे
मैं खुद में गाफिल
सोचती हूँ
क्या दिल्ली कभी किसी की हुई है, मेरे प्रिय!

सोचती थी नदी हूँ मैं करूंगी सरसब्ज
तुम्हें मरुधरा-से मेरे प्रिय खो गई अनंत मरूस्थल में
अपने पूरे वजूद के साथ
कहां रहा फिर प्रेम भी
नदी और मरुधरा का, मेरे प्रिय!

क्या तुम्हारा साथ वाजिब है
जब तुम रीत गए भरते हुए मेरा खालीपन
और मैं रीत गई
भरते हुए तुम्हारा खालीपन
पर किसी का भी नहीं भरा
और रीत गए दोनों ही समूचे, मेरे प्रिय!

  • इस किताब के बारे में

nida fazliआज का युग आतंक बारूद और सरहदों का युग है। अनेक विवादों से ग्र्रस्त हमारे समाज में सब कुछ है, सिर्फ वही नहीं है जो हर समाज के अतीत वर्तमान और भविष्य की सबसे बड़ी ताकत थी और हमेशा रहेगी। इस समाज में प्रेम नहीं है, जो चीज समाज से दूर हो जाती है, वह कला से भी गायब हो जाती है। कवि दुष्यंत ने जो वर्षों से कहीं नहीं है, उसे अपने शब्दों के माध्यम से तलाश करने की कोशिश की है, और इस कोशिश का नाम उन्होंने प्रेम का अन्य दिया है।

– निदा फाजली,  जाने-माने शाइर और लोकप्रिय फिल्म गीतकार

zingoniain Prem ka any (The Other Side of Love) Dushyant hosts the reader inside the intimate realm of a woman torn by love. It is a territory marked by the apex and the abyss of feelings, where her beloved is both “the rays of Sun” that make her “vision infinite” and “a virtuous ablaze of the dying lamp in a temple”. The author reveals that Love is the force moving the Universe, evoking the mood of the Song of Songs, where his feminine alter-ego seems to whisper “I am my beloved’s and my beloved is mine”, knowing that it will not be a “chiffon sari” to mend the wounds of her broken heart, to fill her emptiness, to put an end to her loneliness.
– Zingonia Zingone , Rome, 31 May 2011

I believe that when the blessing or/and catastrophe of love happens, a double of the beloved is formedvictoria in each lover, so Dushyant’s choice of giving a voice to this double is very clever and indeed valid, both poetically and existentially. He does this with a high sensibility and a sparse, sparkling language, making us feel the brilliance and dangers implicit in love’s adventure, the contrast between its absolute power and the fragility inherent to all thqt is is human. Dushyant makes us ride on the top of poetry and love’s waves, which grow with longing and break into nostalgia.   – Victoria Slavuski, Poetess from Spain

chetankrantiशहरों के इस समय में प्रेम दो ऐसे व्यक्तियों का व्यापार है, जो अपने आत्म से उतने नहीं, जितने अपने व्यक्तित्व के बोध से संपन्न हैं। प्रेम का होना उनके लिए एक रोजमर्रा का अनुभव है, जिसको अपने तर्कों से समझा और ग्रहण किया जा सकता है। वह प्रेमियों को अपना ऐसा कुछ भी खोने के लिए तैयार नहीं करता, जो उन्होंने समझ से, अपने वक्त से और अपनी जद्दोजहद से हासिल किया है। प्रेम उन्हें उनके अपने रास्ते से विचलित नहीं करता, इसलिए कंपीटेबिलिटी उसका सबसे बड़ा विमर्श और चिंता है, प्रेम से वो सबसे पहले ये पूछते हैं कि तुम हम दो लोगों को जो अपने-अपने वातावरण में अपने-अपने तरीके से आज तक पहुंचे हैं। कितना साथ रख सकते हो। ये प्रेम या तो सफल होता है या असफल, सिर्फ होना उसका अभिप्रेत नहीं। बहुत सरल ढंग से समझें तो इस तरह के विवाह के लिए एक उपयुक्त साथी। यथासंभव साथ रह सकने लायक एक अन्य की खोज का काम इस सदी ने धीरे-धीरे मैरिज ब्यूरो की चैटिंग साइट्स के माध्यम से इतने लोग प्रेम करके शादी के पवित्र बंधन में बंध गए तो आश्चर्य नहीं होता। स्त्री और पुरुष के रिश्तों को निर्धारक और व्यवस्थापक संस्थाओं, मसलन परिवार और जाति इत्यादि की पृष्ठभूमि के निर्वाह का दायित्व अब प्रेम पर आ पड़ा है। सो प्रेम का सारा दुख और सुख सहचर्य की संभावनाओं और समायोजन की हिमाकतों के सुपुर्द अकेले व्यक्तियों का विषय है, जिनके सामने और भी अनेक चुनौतियां हैं, जिनका जवाब उनको वक्त रहते देना है। दुष्यंत की इन कविताओं की ऊपरी सहजता आज के प्रेम की इसी एकायामिता से निर्मित होती है और कविता शृंखला के रूप में ये कविताएं उस पूरी प्रक्रिया को अंकित करती हैं, जिससे यह प्रेम विवाह ना हो सकने की अपनी नियति को पहुंचाने तक गुजरता है। ये दो ऐसे व्यक्तियों के प्रेम से उपजी पंक्तियां हैं, जो एक-दूसरे के भीतर वो आकाश ढूंढने को अभिशप्त हैं, जो उनके पूर्वजों को उनका समाज होकर उपलब्ध करा दिया करता था। इस प्रेम में एक ना हो पाने का दुख बड़ा नहीं एक निर्णयकता को पूरा-पूरा इस्तेमाल करते हुए उस रिश्ते की  गहराई और वास्तविकता को स्वयं अपने औजारों से परखना चाह रहा है। परखता है और अभिशप्त की प्राप्ति ना होने पर उस दुख का वरण कर लेता है, जो पीछे बचता है अपनी कामनाओं और कोशिशों की स्मृतियों के साथ। इन कविताओं की सरल, सहज कथानकत्मकता वर्तमान प्रेम की उस गैर-जटिलता की तरफ इशारा करती है, जो उसको इसी दौर में मिली है और जो उसको मध्यकालीन कवियों की प्रेमानुभूति से भिन्न बनाती है। प्रेम से रहस्य के चले जाने की घोषणा करती ये कविताएं हमारे समय की उस विडम्बना की तरफ आश्रय करती है, जिसको भोगना प्रेमियों के रूप में आज हमारी नियति है।
– आर. चेतन क्रांति, प्रसिद्ध कवि

pc gandhiसंवाद शैली की  इन  कविताओं में  प्रेम के बहाने सृष्टि में व्याप्त जिस अन्य की बात की गई है, वह अन्य पक्ष ही इन कविताओं को विशिष्ट बनाता है. एक सहज, संतुलित और प्रवाहमान भाषा में दो प्रेमियों के बीच का यह संवाद एक लम्बी उदास कविता है, जहां ना मिल सकने का दुःख बिना किसी आरोप-प्रत्यारोप के प्रेम की नियति बन जाता है, फिर भी प्रेमिल दिनों की स्मृतियों का एक आत्मीय कोलाज पाठक को एक ऐसे अनुभव से भर देता है कि कहीं भीतर प्रेम की एक छोटी-सी बदली हलकी फुहारों से चुपचाप
भिगोये जाती है.
– प्रेमचंद गांधी, जाने – माने कवि

प्रिय और प्रीति का अनोखा लोक
Bodhisatvकवि होना आसान है लेकिन प्रेम का कवि होना बहुत कठिन। कह सकते हैं कि प्रेम का कवि होना तलवार के धार पर चलने की तरह है। दुष्यंत न केवल तलवार की धार पर चलते हैं बल्कि वे तलवार की धार पर पूरे मन से नर्तन करते हैं। सुध-बुध खोते हैं लेकिन प्रेम का धागा नहीं नहीं तोड़ते। कितनी रंगतें हैं यहाँ प्रेम की कितनी छवियाँ टूटती झिलमिलाती पुकारती खो जाती फिर ठांप लेती कितना जगर-मगर है इस कवि का प्रेम-संसार बिल्कुल सामने और बिल्कुल अदृश्य। इसे देखने के लिए और इसकी प्रतीति के लिए प्रेम रस माती आँख चाहिए..जो बाहर भीतर सब तरफ देखे…और प्रिय की अनुभूति कर सके।
– बोधिसत्व, प्रसिद्ध कवि

sathya saran
It’s never easy for a man to understand women. But these poems reflect a rare understanding indeed. This intimate portrait of a woman in love should find an echo in many reader’s hearts.
– Sathya Saran, Author and Journalist, Ex Editor Femina

 

ajanta deoइन कविताओं को लेकर दुष्यंत शायद थोड़ा शंकित हैं कि वे बेहद निजी हैं और इन्हें छपाना ठीक होगा या नहीं, लेकिन ऐसा होता तो श्वि अनेक गहन पे्रम कविताओं से वंचित रहता। ये कविताएं एक निविड़ संसार की रचना करती हैं। इसमें ऐंद्रिकता से ज्यादा उदासी का रंग झलकता है-ये ऐसे प्रेम की कविता है जिसे अब केवल याद किया जा रहा है हालांकि लगातार लगता रहता है कि प्रेम समाप्त नहीं हुआ है-नहीं हो सकता। एक स्त्री की ओर से लिखी गई ये कविताएं मुझे आश्चर्य में डालती हैं कि दुष्यंत स्त्री मन को कितने बेहतर ढंग से जानते हैं- विशेषकर पैतृक गांव की श्रृंखला। इनका शिल्प कहीं कहीं कनुप्रिया की याद दिलाता है और इन्हें एक लंबी परंपरा से जोड़ता है। दुष्यंत की कहानियां तो उनकी प्रतिभा को बताती ही हैं- कविताएं भी बेहद आश्वस्त करती हैं।
– अजंता देव, चर्चित कवयित्री